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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  1.100.68 
एवमेतन्मनुष्येषु तच्च सर्वप्रजास्विति॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
'बच्चों का महत्व मनुष्यों में भी उसी प्रकार माना जाता है, जिस प्रकार अन्य सभी प्राणियों में।' 68.
 
‘The importance of children is recognized in humans in the same way as it is in all other creatures too. 68.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)