Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.100.65: 'गंगानंदन! यदि आप पर कोई विपत्ति आ पड़ी, तो उसी दिन हमारा वंश नष्ट हो जाएगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि आप अकेले ही मेरे लिए सौ पुत्रों से श्रेष्ठ हैं।'   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  1.100.65 
कथंचित् तव गाङ्गेय विपत्तौ नास्ति न: कुलम्।
असंशयं त्वमेवैक: शतादपि वर: सुत:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
'गंगानंदन! यदि आप पर कोई विपत्ति आ पड़ी, तो उसी दिन हमारा वंश नष्ट हो जाएगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि आप अकेले ही मेरे लिए सौ पुत्रों से श्रेष्ठ हैं।'
 
‘Ganganandan! If any calamity befalls you, then our lineage will end that very day. There is no doubt that you alone are better than a hundred sons for me. 65.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)