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mahabharat 1.100.47: घूमते-घूमते उन्होंने केवट की एक कन्या देखी जो देवी के समान सुन्दर थी। उस श्याम नेत्रों वाली कन्या को देखकर राजा ने पूछा-॥47॥   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.100.47 
स ददर्श तदा कन्यां दाशानां देवरूपिणीम्।
तामपृच्छत् स दृष्ट्वैव कन्यामसितलोचनाम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
घूमते-घूमते उन्होंने केवट की एक कन्या देखी जो देवी के समान सुन्दर थी। उस श्याम नेत्रों वाली कन्या को देखकर राजा ने पूछा-॥47॥
 
While roaming around, he saw a girl of the boatmen who was as beautiful as a goddess. On seeing that girl with dark eyes, the king asked -॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)