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mahabharat 1.100.28: शान्तनु ने अपने पुत्र को जन्म के समय ही प्रथम बार देखा था; अतः बुद्धिमान राजा को उस समय उसकी याद नहीं रही; इसी कारण वे अपने पुत्र को पहचान नहीं सके॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.100.28 
जातमात्रं पुरा दृष्ट्वा तं पुत्रं शान्तनुस्तदा।
नोपलेभे स्मृतिं धीमानभिज्ञातुं तमात्मजम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
शान्तनु ने अपने पुत्र को जन्म के समय ही प्रथम बार देखा था; अतः बुद्धिमान राजा को उस समय उसकी याद नहीं रही; इसी कारण वे अपने पुत्र को पहचान नहीं सके॥ 28॥
 
Shantanu had seen his son for the first time at the time of his birth; therefore the wise king did not remember him at that time; that is why he could not recognize his own son.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)