Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.100.103: उन्होंने कहा, 'मेरे भोले पुत्र! जब तक तुम यहाँ जीवित रहना चाहते हो, तब तक मृत्यु तुम पर कोई प्रभाव नहीं डाल सकती। मृत्यु तो तुम्हारी अनुमति लेकर ही तुम पर अपना प्रभाव दिखा सकती है।'॥103॥ | mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न ते मृत्यु: प्रभविता यावज्जीवितुमिच्छसि।
त्वत्तो ह्यनुज्ञां सम्प्राप्य मृत्यु: प्रभवितानघ॥ १०३॥
अनुवाद
उन्होंने कहा, 'मेरे भोले पुत्र! जब तक तुम यहाँ जीवित रहना चाहते हो, तब तक मृत्यु तुम पर कोई प्रभाव नहीं डाल सकती। मृत्यु तो तुम्हारी अनुमति लेकर ही तुम पर अपना प्रभाव दिखा सकती है।'॥103॥
He said, 'My innocent son! As long as you wish to stay alive here, death cannot have any effect on you. Death can show its effect on you only after taking your permission.'॥ 103॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि सत्यवतीलाभोपाख्याने शततमोऽध्याय:॥ १००॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें सत्यवतीलाभोपाख्यानविषयक सौवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १००॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १३ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ११६ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥