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mahabharat 1.100.102: भीष्म द्वारा किए गए इस कठिन कार्य को सुनकर राजा शान्तनु बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने महाबली भीष्म को सजीव मृत्यु का वरदान दिया ॥102॥   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  1.100.102 
तच्छ्रुत्वा दुष्करं कर्म कृतं भीष्मेण शान्तनु:।
स्वच्छन्दमरणं तुष्टो ददौ तस्मै महात्मने॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
भीष्म द्वारा किए गए इस कठिन कार्य को सुनकर राजा शान्तनु बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने महाबली भीष्म को सजीव मृत्यु का वरदान दिया ॥102॥
 
On hearing of the arduous task performed by Bhishma, King Shantanu was very pleased and he granted the boon of a free death to the great Bhishma.॥102॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)