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mahabharat 1.100.10: उस समय शान्त राजाओं द्वारा रक्षित लोक में सभी वर्णों के लोग नियमानुसार प्रत्येक व्यवहार में धर्म को प्रधानता देने लगे ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.100.10 
शान्तनुप्रमुखैर्गुप्ते लोके नृपतिभिस्तदा।
नियमात् सर्ववर्णानां धर्मोत्तरमवर्तत॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उस समय शान्त राजाओं द्वारा रक्षित लोक में सभी वर्णों के लोग नियमानुसार प्रत्येक व्यवहार में धर्म को प्रधानता देने लगे ॥10॥
 
At that time, in a world protected by peaceful kings, people of all castes began to give priority to Dharma in every interaction as per the rules. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)