vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् भगवद्-गीता
»
अध्याय 8: भगवत्प्राप्ति
»
श्लोक 18
श्लोक
8.18
अव्यक्ताद् व्यक्तय: सर्वा: प्रभवन्त्यहरागमे ।
रात्र्यागमे प्रलीयन्ते तत्रैवाव्यक्तसंज्ञके ॥ १८ ॥
अनुवाद
ब्रह्मा के दिन के प्रारम्भ में सभी जीव अव्यक्त अवस्था से व्यक्त हो जाते हैं और तत्पश्चात् जब रात्रि होती है तो वे पुनः अव्यक्त में विलीन हो जाते हैं।
At the beginning of Brahma's day all beings emerge from the unmanifested state and then when night comes they again merge back into the unmanifested.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×