नित्यो नित्यानां चेतनश्चेतनानाम्
एको बहुनाम यो विदधाति कामं
वह सभी शाश्वत के बीच प्रमुख शाश्वत हैं। वह सभी जीवित संस्थाओं की सर्वोच्च जीवित इकाई है, और वह अकेला ही सभी जीवन का भरण-पोषण करता है। बुद्धि के बिना कोई कुछ नहीं कर सकता है, और कृष्ण यह भी कहते हैं कि वह सभी बुद्धि के मूल हैं। जब तक कोई व्यक्ति बुद्धिमान नहीं हो जाता तब तक वह ईश्वर के सर्वोच्च व्यक्तित्व, कृष्ण को समझ नहीं सकता है।
