Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 gita 11.31: हे देवों के देव, अत्यंत भयंकर रूप वाले, कृपया मुझे बताएँ कि आप कौन हैं। मैं आपको प्रणाम करता हूँ; कृपया मुझ पर कृपा करें। आप आदि देव हैं। मैं आपके बारे में जानना चाहता हूँ, क्योंकि मुझे नहीं पता कि आपका उद्देश्य क्या है। | अध्याय 11: विराट रूप । श्रीमद् भगवद्-गीता Srimad Bhagavad Gita | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आख्याहि मे को भवानुग्ररूपो
नमोऽस्तु ते देववर प्रसीद ।
विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यं
न हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम् ॥ ३१ ॥
अनुवाद
हे देवों के देव, अत्यंत भयंकर रूप वाले, कृपया मुझे बताएँ कि आप कौन हैं। मैं आपको प्रणाम करता हूँ; कृपया मुझ पर कृपा करें। आप आदि देव हैं। मैं आपके बारे में जानना चाहता हूँ, क्योंकि मुझे नहीं पता कि आपका उद्देश्य क्या है।
O Deveshwar! Kindly tell me who you are in such a fierce form? I bow to you, kindly be pleased with me. You are the original God. I want to know you, because I am not able to know what your purpose is.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥