| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार » श्लोक 96 |
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| | | | श्लोक 3.9.96  | कोन् छार पदार्थ एइ दुइ - लक्ष काहन ? ।
प्राण - राज्य करों प्रभु - पदे निर्मज्छन” ॥96॥ | | | | | | | अनुवाद | | "मुझे इस दो लाख काहन की छोटी सी रकम की कोई परवाह नहीं। इसकी तो बात ही क्या, मैं तो अपना जीवन और राज्य सहित सब कुछ प्रभु के चरणकमलों में न्यौछावर कर दूँगा।" | | | | "I don't care about this small sum of two hundred thousand rupees. What's the point of that? I can offer my life and everything, including my kingdom, at the feet of the Emperor." | | ✨ ai-generated | | |
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