श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  3.9.82 
नित्य आ सि’ करे मिश्रेर पाद संवाहन ।
जगन्नाथ - सेवार करे भियान श्रवण ॥82॥
 
 
अनुवाद
वह प्रतिदिन काशी मिश्र के घर उनके चरणकमलों की मालिश करने आते थे। राजा उनसे यह भी सुनते थे कि भगवान जगन्नाथ की कितनी भव्य सेवा की जा रही है।
 
He visited Kashi Mishra's house daily to touch his feet. He also heard from him how magnificently Lord Jagannatha was served.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)