श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  3.9.78 
एथा तुमि वसि’ रह, केने याबे आलालनाथ ? ।
केह तोमा ना शुनाबे विषयीर बात् ॥78॥
 
 
अनुवाद
"कृपया यहीं जगन्नाथ पुरी में निवास करें। आप अलालानाथ क्यों जाएँ? अब से कोई भी भौतिक मामलों के लिए आपके पास नहीं आएगा।"
 
"Please stay here in Jagannathpuri. Why should you go to Alalnath? From now on, no one will come to you for material things."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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