श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  3.9.75 
सेइ ‘शुद्ध - भक्त’, ये तोमा भजे तोमा ला गि’ ।
आपनार सुख - दुःखे हय भोग - भोगी’ ॥75॥
 
 
अनुवाद
"गोपीनाथ पटनायक एक शुद्ध भक्त हैं जो केवल आपकी संतुष्टि के लिए आपकी पूजा करते हैं। उन्हें अपने व्यक्तिगत सुख-दुःख की परवाह नहीं होती, क्योंकि यह तो भौतिकवादी का काम है।"
 
"Gopinath Patnaik is a pure devotee and worships You solely for Your satisfaction. He cares not the least for his own happiness or sorrow, for this is the work of a materialist.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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