श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  3.9.67 
काशी - मिश्र कहे प्रभुर धरिया चरणे ।
“तुमि केने एइ बाते क्षोभ कर मने? ॥67॥
 
 
अनुवाद
काशी मिश्र ने भगवान के चरणकमल पकड़ लिए और कहा, "आप इन बातों से क्यों विचलित हो रहे हैं?
 
Kashi Mishra took hold of Mahaprabhu's feet and said, "Why are you upset by these things? What is the relationship of the ascetic and the detached Tomar?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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