श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  3.9.58 
शुनि’ महाप्रभु ह - इला परम आनन्द ।
के बुझिते पारे गौरेर कृपा - छन्द - बन्ध? ॥58॥
 
 
अनुवाद
यह समाचार सुनकर भगवान बहुत प्रसन्न हुए। भक्त पर भगवान की कृपा को कौन समझ सकता है?
 
Mahaprabhu was delighted to hear this news. Who can truly understand Mahaprabhu's grace upon his devotee?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)