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श्लोक 3.9.58  |
शुनि’ महाप्रभु ह - इला परम आनन्द ।
के बुझिते पारे गौरेर कृपा - छन्द - बन्ध? ॥58॥ |
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| अनुवाद |
| यह समाचार सुनकर भगवान बहुत प्रसन्न हुए। भक्त पर भगवान की कृपा को कौन समझ सकता है? |
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| Mahaprabhu was delighted to hear this news. Who can truly understand Mahaprabhu's grace upon his devotee? |
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