श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  3.9.55 
एथा प्रभु सेइ मनुष्येरे प्रश्न कैल ।
“वाणीनाथ कि करे, यबे बान्धिया आनिल ?” ॥55॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने दूत से पूछा, "जब वाणिनाथ को गिरफ्तार करके वहाँ लाया गया था, तब वह क्या कर रहा था?"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu asked the messenger, “What was Vaninath doing when he was brought there as a prisoner?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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