श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.9.47 
विशेष ताहार ठाञि कौड़ि बाकी हय ।
प्राण निले किबा लाभ ? निज धन - क्षय ॥47॥
 
 
अनुवाद
"उसका कसूर बस इतना है कि उस पर सरकार का कुछ पैसा बकाया है। लेकिन अगर उसे मार दिया गया, तो क्या फ़ायदा होगा? नुकसान तो सरकार का होगा, क्योंकि उसे पैसा नहीं मिलेगा।"
 
"His only fault is that he owes the government something. But if he's killed, what good will it do? The government will be at a loss because it won't get the money."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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