श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.9.37 
“रामानन्द - रायेर गोष्ठी, सब - तोमार ‘दास’ ।
तोमार उचित नहे ऐछन उदास” ॥37॥
 
 
अनुवाद
रामानन्द राय के परिवार के सभी सदस्य आपके सनातन सेवक हैं। अब वे संकट में हैं। आपके लिए उनके प्रति इस प्रकार उदासीन रहना उचित नहीं है।"
 
"All the members of Ramanand Rai's family are your eternal servants. Now they are in trouble.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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