श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  3.9.3 
जयाद्वैताचार्य जय जय दयामय ।
जय गौर - भक्त - गण सब रसमय ॥3॥
 
 
अनुवाद
अद्वैत आचार्य की जय हो, जो अत्यंत दयालु हैं! श्री चैतन्य महाप्रभु के भक्तों की जय हो, जो सदैव दिव्य आनंद से अभिभूत रहते हैं!
 
All hail Sri Advaita Acharya, the most compassionate. All hail Sri Chaitanya Mahaprabhu's devotees, who are always filled with transcendental bliss.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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