श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.9.26 
‘आमार घोड़ा ग्रीवा ना फिराय ऊर्ध्वे नाहि चाय ।
ताते घोड़ार मूल्य घाटि करिते ना युयाय’ ॥26॥
 
 
अनुवाद
गोपीनाथ पटनायक ने कहा, 'मेरे घोड़े कभी अपनी गर्दन नहीं घुमाते, न ही ऊपर देखते हैं। इसलिए उनकी कीमत कम नहीं की जानी चाहिए।'
 
"Gopinath Patnaik said, 'My horses never bend their necks or look up. Therefore, their prices should not be reduced.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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