श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.9.2 
जय जय श्री कृष्ण - चैतन्य दयामय ।
जय जय नित्यानन्द करुण - हृदय ॥2॥
 
 
अनुवाद
परम दयालु अवतार श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु की जय हो! भगवान नित्यानंद की जय हो, जिनका हृदय सदैव करुणामय रहता है!
 
Hail to the most merciful incarnation Shri Krishna Chaitanya Mahaprabhu! Glory to Lord Nityananda, whose heart is always full of compassion!
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)