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श्लोक 3.9.115  |
के कहिते पारे गौरेर आश्चर्य स्वभाव ? ।
ब्रह्मा - शिव आदि याँर ना पाय अन्तर्भाव ॥115॥ |
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| अनुवाद |
| श्री चैतन्य महाप्रभु के अद्भुत गुणों का आकलन कोई नहीं कर सकता। यहाँ तक कि ब्रह्मा और शिव भी उनके इरादों को नहीं समझ सकते। |
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| No one can fathom the wondrous nature of Sri Chaitanya Mahaprabhu. Even Brahma and Shiva are unable to understand Mahaprabhu's emotions. |
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