श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  3.9.115 
के कहिते पारे गौरेर आश्चर्य स्वभाव ? ।
ब्रह्मा - शिव आदि याँर ना पाय अन्तर्भाव ॥115॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु के अद्भुत गुणों का आकलन कोई नहीं कर सकता। यहाँ तक कि ब्रह्मा और शिव भी उनके इरादों को नहीं समझ सकते।
 
No one can fathom the wondrous nature of Sri Chaitanya Mahaprabhu. Even Brahma and Shiva are unable to understand Mahaprabhu's emotions.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd