श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.9.11 
बाहिरे फुकारे लोक, दर्शन ना पा ञा ।
‘कृष्ण कह’ बलेन प्रभु बाहिरे आसिया ॥11॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु को न देख पाने के कारण, उनके कक्ष के बाहर खड़े लोग शोर मचाते थे। इस प्रकार श्री चैतन्य महाप्रभु बाहर जाकर उनसे कहते, "हरे कृष्ण का जप करो।"
 
Unable to see Sri Chaitanya Mahaprabhu, the crowd would make a loud noise outside his room. Thus, Sri Chaitanya Mahaprabhu would emerge and say to them, “Chant Hare Krishna.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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