श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  3.9.109 
‘राज्य - विषय - फल एइ - कृपार ‘आभा से’! ।
ताहार गणना कारो मने नाहि आइसे! ॥109॥
 
 
अनुवाद
गोपीनाथ पटनायक को भगवान की कृपा की एक झलक मात्र से राजसी ऐश्वर्य प्राप्त हुआ। इसलिए उनकी कृपा का पूरा मूल्य कोई नहीं आंक सकता।
 
Gopinath Patnaik received the fruits of royal prosperity through a mere glimpse of Mahaprabhu's grace. Therefore, the full magnitude of His grace cannot be calculated.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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