श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  3.9.107 
एत बलि’ ‘नेत - धटी’ तारे पराइल ।
प्रभु - आज्ञा लञा याह, विदाय तोमा दिल” ॥107॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर राजा ने उसके शरीर पर एक रेशमी आवरण चढ़ाकर उसे नियुक्त कर दिया। उसने कहा, "श्री चैतन्य महाप्रभु के पास जाओ। उनसे अनुमति लेकर अपने घर जाओ। मैं तुम्हें विदा करता हूँ। अब तुम जा सकते हो।"
 
Saying this, the king appointed him by covering his body with a silk sheet.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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