श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  3.9.102 
राजा कहे, “कौड़ि छाड़िमु, - इहा ना कहिबा ।
सहजे मोर प्रिय ता ‘रा, - इहा जानाइबा ॥102॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा, "मैं गोपीनाथ पटनायक को उसके सारे ऋणों से मुक्त कर दूँगा, लेकिन भगवान से इस बारे में बात मत करना। उन्हें बस इतना बता देना कि गोपीनाथ पटनायक सहित भवानंद राय के सभी परिवारजन स्वाभाविक रूप से मेरे प्रिय मित्र हैं।"
 
The king said, "I will clear all of Gopinath Patnaik's debts, but don't mention this to Mahaprabhu. Just tell him that Bhavananda Raya's entire family and Gopinath Patnaik are my dear friends."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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