श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  3.9.101 
मिश्र कहे, “कौड़ि छाड़िबा , - नहे प्रभुर मने ।
कौड़ि छाड़िले प्रभु कदाचित् दुःख माने” ॥101॥
 
 
अनुवाद
काशी मिश्र ने कहा, "गोपीनाथ पटनायक को उनके सभी ऋणों से मुक्त करने से भगवान अप्रसन्न होंगे, क्योंकि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है।"
 
Kashi Mishra said, “Mahaprabhu will be sad if Gopinath Patnaik's debt is waived, because this is not his intention.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)