श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.9.10 
प्रह्लाद, बलि, व्यास, शुक आदि मुनि - गण ।
आसि’ प्रभु देखि प्रेमे हय अचेतन ॥10॥
 
 
अनुवाद
प्रहलाद महाराज, बलि महाराज, व्यासदेव, शुकदेव गोस्वामी और अन्य महान संत श्री चैतन्य महाप्रभु से मिलने आए। उन्हें देखते ही वे कृष्ण के प्रेम में अचेत हो गये।
 
Prahlada Maharaja, Bali Maharaja, Srila Vyasadeva, Sukadeva Goswami, and many other great sages would come to see Sri Chaitanya Mahaprabhu. Upon seeing him, they would become unconscious in love for Krishna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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