श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.9.1 
अगण्य - धन्य - चैतन्य - गणानां प्रेम - वन्यया ।
निन्येऽधन्य - जन - स्वान्त - मरुः शश्वदनूपताम् ॥1॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु के असंख्य यशस्वी अनुयायियों ने अभागे लोगों के मरुस्थल जैसे हृदयों में निरन्तर प्रेम की बाढ़ ला दी।
 
The countless proud followers of Sri Chaitanya Mahaprabhu brought a flood of fervent love into the desert-like hearts of the unfortunate people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)