श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 8: रामचन्द्र पुरी द्वारा महाप्रभु की आलोचना  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  3.8.83 
“इँहार वचने केने अन्न त्याग कर ? ।
पूर्ववत् निमन्त्रण मान’, - सबार बोल धर” ॥83॥
 
 
अनुवाद
"रामचन्द्र पुरी की निंदा के कारण आपने उचित भोजन क्यों त्याग दिया है? कृपया पहले की तरह निमंत्रण स्वीकार करें। यही हम सबकी प्रार्थना है।"
 
"Why have you stopped eating properly because of Ramachandra Puri's criticism? Please accept the invitation as before. This is our request."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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