श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 8: रामचन्द्र पुरी द्वारा महाप्रभु की आलोचना  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  3.8.82 
इँहार स्वभाव इहाँ करिते ना युयाय ।
तथापि कहिये किछु मर्म - दुःख पाय ॥82॥
 
 
अनुवाद
"इसलिए, रामचन्द्र पुरी के सिद्धांतों का पालन नहीं करना चाहिए। फिर भी, मुझे उनके विरुद्ध कुछ कहना है क्योंकि वे हमारे हृदय को दुःखी कर रहे हैं।"
 
"Therefore, no one should follow the principles of Ramachandra Puri. Yet, I have to say something against him because he is grieving our hearts."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)