| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 8: रामचन्द्र पुरी द्वारा महाप्रभु की आलोचना » श्लोक 74 |
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| | | | श्लोक 3.8.74  | खाओयाञा पुनः तारे करये निन्दन ।
एत अन्न खाओ , - तोमार कत आछे धन ? ॥74॥ | | | | | | | अनुवाद | | इस तरह वह व्यक्ति को ज़रूरत से ज़्यादा खाने के लिए उकसाता है, और फिर सीधे उसकी आलोचना करते हुए कहता है, ‘तुम इतना खाते हो। तुम्हारे ख़ज़ाने में कितना पैसा है?’ | | | | "This way he feeds someone more than they need. And then he directly criticizes them, saying, 'You eat so much. How much money do you have in your treasury?' | | ✨ ai-generated | | |
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