श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 8: रामचन्द्र पुरी द्वारा महाप्रभु की आलोचना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  3.8.72 
“रामचन्द्र - पुरी हय निन्दुक - स्वभाव ।
तार बोले अन्न छाड़ि’ किबा हबे लाभ ?” ॥72॥
 
 
अनुवाद
परमानंद पुरी बोले, "मेरे गुरुभाई रामचंद्र पुरी स्वभाव से ही कटु आलोचक हैं। यदि आप उनके वचनों के कारण भोजन त्याग दें, तो क्या लाभ होगा?"
 
Paramananda Puri said, "My godbrother Ramchandra Puri is a bad critic by nature. If you give up eating because of his words, what good will it do?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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