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श्लोक 3.8.7  |
हेन - काले रामचन्द्र - पुरी - गोसाञि आइला ।
परमानन्द - पुरीरे आर प्रभुरे मिलिला ॥7॥ |
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| अनुवाद |
| तब रामचन्द्र पुरी गोसानी नामक एक संन्यासी परमानंद पुरी और श्री चैतन्य महाप्रभु से मिलने आये। |
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| Then a monk named Ramchandra Puri Gosain came to meet Paramananda Puri and Sri Chaitanya Mahaprabhu. |
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