श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 8: रामचन्द्र पुरी द्वारा महाप्रभु की आलोचना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  3.8.69 
प्रभु कहे, - “अज्ञ बालक मुइ शिष्य’ तोमार।
मोरे शिक्षा देह’, - एइ भाग्य आमार” ॥69॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने तब विनम्रतापूर्वक कहा, "मैं एक अज्ञानी बालक के समान हूँ और आपके शिष्य के समान हूँ। यह मेरा सौभाग्य है कि आप मुझे शिक्षा दे रहे हैं।"
 
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu humbly requested, "I am like an innocent child and I am like your disciple. It is my great fortune that you are teaching me."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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