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श्लोक 3.8.55  |
सकल वैष्णवे गोविन्द कहे एइ बात् ।
शुनि’ सबार माथे यैछे हैल वज्राघात ॥55॥ |
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| अनुवाद |
| गोविंद ने यह संदेश सभी भक्तों को सुनाया। जब उन्होंने इसे सुना, तो उन्हें ऐसा लगा जैसे उनके सिर पर वज्र गिर पड़ा हो। |
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| Govinda passed this information to all the devotees. When they heard it, they felt as if a thunderbolt had struck their heads. |
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