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श्लोक 3.8.5  |
जय जय श्रीवासादि यत भक्त - गण ।
श्री - कृष्ण - चैतन्य प्रभु - याँर प्राण - धन ॥5॥ |
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| अनुवाद |
| श्रीवास ठाकुर सहित सभी भक्तों की जय हो! श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु उनके जीवन और आत्मा हैं। |
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| Glory to all the devotees like Shrivas Thakur etc! Shri Krishna Chaitanya Mahaprabhu is the soul and life of all of them. |
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