श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 8: रामचन्द्र पुरी द्वारा महाप्रभु की आलोचना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.8.35 
एइ श्लोके कृष्ण - प्रेम करे उपदेश ।
कृष्णेर विरहे भक्तेर भाव - विशेष ॥35॥
 
 
अनुवाद
इस श्लोक में माधवेंद्र पुरी सिखाते हैं कि कृष्ण के प्रति परमानंद प्रेम कैसे प्राप्त किया जाए। कृष्ण से वियोग का अनुभव करके, व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से स्थिर हो जाता है।
 
In this verse, Madhavendra Puri teaches how to attain love for Krishna. In separation from Krishna, one attains spiritual realm.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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