श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 8: रामचन्द्र पुरी द्वारा महाप्रभु की आलोचना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.8.30 
तुष्ट हञा पुरी ताँरे कैला आलिङ्गन ।
वर दिला - ‘कृष्णे तोमार हउक प्रेम - धन’ ॥30॥
 
 
अनुवाद
ईश्वर पुरी से प्रसन्न होकर माधवेन्द्र पुरी ने उन्हें गले लगाया और उन्हें आशीर्वाद दिया कि वे कृष्ण के महान भक्त और प्रेमी बनेंगे।
 
Pleased with Ishvara Puri, Madhavendra Puri embraced him and blessed him that he would be a great devotee and lover of Krishna.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd