श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 8: रामचन्द्र पुरी द्वारा महाप्रभु की आलोचना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.8.24 
मोरे मुख ना देखाबि तुइ, याओ यथि - तथि।
तोरे देखि’ मैले मोर ह बे असद्गति ॥24॥
 
 
अनुवाद
"मुझे अपना चेहरा मत दिखाना! जहाँ चाहो वहाँ चली जाओ। अगर मैं तुम्हारा चेहरा देखते हुए मर गया, तो मैं अपने जीवन की मंज़िल तक नहीं पहुँच पाऊँगा।"
 
"Don't show me your face! Go wherever else you want. If I die looking at your face, I won't have achieved my goal in life."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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