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श्लोक 3.8.17  |
एइ त’ स्वभाव ताँ र आग्रह करिया ।
पिछे निन्दा करे, आगे बहुत खाओयाञा ॥17॥ |
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| अनुवाद |
| रामचन्द्र पुरी की विशेषता यह थी कि पहले वे किसी को आवश्यकता से अधिक खाने के लिए प्रेरित करते थे और फिर उसकी आलोचना करते थे। |
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| Ramchandra Puri's nature was that he would first feed someone more than required and then criticize him. |
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