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श्लोक 3.8.13  |
आग्रह करिया ताँरे वसि’ खाओयाइल ।
आपने आग्रह क रि’ परिवेशन कैल ॥13॥ |
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| अनुवाद |
| बड़ी उत्सुकता से रामचन्द्र पुरी ने जगदानंद पंडित को बैठाया और स्वयं उन्हें प्रसाद परोसा। |
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| Ramchandra Puri very eagerly made Jagadanand Pandit sit and served him the Prasad himself. |
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