श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  3.7.96 
यद्यपि पण्डित आर ना कैला अङ्गीकार ।
भट्ट याइ’ तबु पड़े करि’ बलात्कार ॥96॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि गदाधर पंडित गोसांई इसे सुनना नहीं चाहते थे, फिर भी वल्लभ भट्ट ने बड़ी तीव्रता से उनका स्पष्टीकरण पढ़ना शुरू कर दिया।
 
Although Gadadhara Pandit Gosain did not want to listen, Vallabh Bhatta started reading his explanation with great force.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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