श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  3.7.94 
“कृष्ण - नाम - व्याख्या यदि करह श्रवण ।
तबे मोर लज्जा - पङ्क हय प्रक्षालन” ॥94॥
 
 
अनुवाद
"कृपया भगवान कृष्ण के नाम के अर्थ की मेरी व्याख्या सुनें। इस प्रकार मुझ पर जो कलंक लगा है, वह धुल जाएगा।"
 
"Please listen to my explanation of the meaning of the name Krishna. This will wash away the mud of shame that has fallen upon me."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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