श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  3.7.92 
लज्जित हैल भट्ट, हैल अपमाने ।
दुःखित हञा गेल पण्डितेर स्थाने ॥92॥
 
 
अनुवाद
शर्मिंदा, अपमानित और दुखी, वल्लभ भट्ट गदाधर पंडित के पास गए।
 
Ashamed, humiliated and sad, Vallabh Bhatt went to Gadhdhar Pandit.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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