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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 3: अन्त्य लीला
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अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट
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श्लोक 91
श्लोक
3.7.91
प्रभुर उपेक्षाय सब नीलाचलेर जन ।
भट्टेर व्याख्यान किछु ना करे श्रवण ॥91॥
अनुवाद
चूँकि श्री चैतन्य महाप्रभु वल्लभ भट्ट को बहुत गम्भीरता से नहीं लेते थे, इसलिए जगन्नाथ पुरी में कोई भी व्यक्ति उनकी व्याख्या नहीं सुनता था।
Since Sri Chaitanya Mahaprabhu did not take Vallabha Bhatta seriously, no one in Jagannathapuri heard any of his explanations.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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