श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.7.9 
तोमारे ये स्मरण करे, से हय पवित्र ।
दर्शने पवित्र हबे , - इथे कि विचित्र ? ॥9॥
 
 
अनुवाद
“जब आपका स्मरण करने वाला शुद्ध हो जाता है, तो फिर आपके दर्शन से शुद्ध हो जाना क्यों आश्चर्य की बात है?
 
“Since whoever remembers you becomes pure, what wonder is it that someone becomes pure by seeing you?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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