श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  3.7.84 
भट्ट कहे, “कृष्ण - नामेर अर्थ - व्याख्याने ।
विस्तार कैराछि, ताहा करह श्रवणे” ॥84॥
 
 
अनुवाद
वल्लभ भट्ट बोले, "मैंने कृष्ण के पवित्र नाम का अर्थ विस्तार से समझाने का प्रयास किया है। कृपया व्याख्या सुनें।"
 
Vallabha Bhatta said, "I have tried to explain the meaning of the holy name of Krishna in detail. Please listen to that explanation."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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