श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  3.7.83 
वसि’ कृष्ण - नाम मात्र करिये ग्रहणे ।
सङ्ख्या - नाम पूर्ण मोर नहे रात्रि - दिने ॥83॥
 
 
अनुवाद
"मैं बस बैठकर कृष्ण के पवित्र नाम का जप करने का प्रयास करता हूँ, और यद्यपि मैं दिन-रात जप करता हूँ, फिर भी मैं अपनी निर्धारित संख्या में माला जप पूरा नहीं कर पाता हूँ।"
 
“I simply sit and try to chant the holy name of Krishna, and even though I chant day and night, I am unable to complete the prescribed number.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)